Rajasthan Nikay Chunav 2026 Result के बाद BJP-कांग्रेस के बीच पार्षदों की छीना-झपटी

Rajasthan Nikay Chunav 2026 Result के बाद BJP-कांग्रेस के बीच पार्षदों की छीना-झपटी

Rajasthan Nikay Chunav 2026 Result – राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब अगली लड़ाई बोर्ड गठन को लेकर शुरू हो गई है। Rajasthan Nikay Chunav 2026 Result – जिन नगर निकायों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही संख्या जुटाने में लगी हैं। खासतौर पर निर्दलीय पार्षदों पर दोनों दलों की नजर है।

अजमेर, पाली, जोधपुर, अलवर और खैरथल समेत कई निकायों में बोर्ड बनाने के लिए एक-एक पार्षद का समर्थन अहम हो गया है। दोनों पार्टियां पार्षदों से संपर्क साध रही हैं और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बावजूद बीजेपी ने बोर्ड बनाने की कोशिशें पूरी तरह बंद नहीं की हैं।

Rajasthan Nikay Chunav 2026 Result – बीजेपी चल रही है दांव

खैरथल नगर परिषद में बोर्ड गठन को लेकर चल रही राजनीतिक गतिविधियां इसका बड़ा उदाहरण हैं। यहां कुल 45 वार्ड हैं। कांग्रेस ने 20 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी को 8 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 17 सीटें मिलीं। बहुमत के लिए 23 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। यानी कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से केवल तीन सीट दूर थी।

Rajasthan Nikay Chunav 2026 Result के बाद BJP-कांग्रेस के बीच पार्षदों की छीना-झपटी
Rajasthan Nikay Chunav 2026 Result

इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विक्रम सिंह उर्फ विक्की चौधरी ने 11 पार्षदों को बीजेपी के साथ लाने का दावा करते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बीजेपी की सदस्यता ली। उनकी तस्वीर भी सामने आई है।

विक्रम सिंह के बीजेपी में जाने के बाद खैरथल में बोर्ड गठन का गणित बदल गया है। अब दोनों दलों की नजर 17 निर्दलीय पार्षदों पर है। बोर्ड बनाने के लिए 23 पार्षदों का समर्थन चाहिए।

Rajasthan Nikay Chunav 2026 –अजमेर में कांग्रेस बहुमत से चार सीट दूर

80 वार्ड वाले अजमेर नगर निगम में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। बीजेपी के खाते में 32 सीटें आई हैं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने 11 वार्डों में जीत हासिल की है।

यहां बहुमत का आंकड़ा 41 है। ऐसे में कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। कांग्रेस निर्दलीय पार्षदों के सहारे बोर्ड बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं बीजेपी के लिए भी निर्दलीय पार्षद संख्या बढ़ाने का प्रमुख जरिया हैं।

इस बीच बीजेपी के बड़े नेताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है। पुष्कर में चल रही बाड़ेबंदी के बीच बोर्ड गठन को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है।

Rajasthan Nikay Chunav –पाली में भी निर्दलीय पर सबकी नजर

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के जिले पाली में भी बोर्ड गठन का रास्ता आसान नहीं है। यहां कांग्रेस ने 29, बीजेपी ने 21 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की है।

कुल 65 वार्ड वाली इस निकाय में बहुमत के लिए 34 पार्षद चाहिए। कांग्रेस बहुमत से पांच सीट दूर है, जबकि बीजेपी को बहुमत तक पहुंचने के लिए 13 और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है।

ऐसे में 15 निर्दलीय पार्षद दोनों दलों के लिए अहम हो गए हैं। बीजेपी भी अपनी ओर से बोर्ड बनाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है।

Rajasthan Nikay Chunav Bjp vs Congress –जोधपुर में बीजेपी-कांग्रेस बराबर

100 वार्ड वाले जोधपुर नगर निगम में बीजेपी और कांग्रेस को बराबर 44-44 सीटें मिली हैं। बाकी 12 सीटों पर निर्दलीय और अन्य उम्मीदवार विजयी हुए हैं।

यहां बहुमत के लिए 51 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। यानी बीजेपी और कांग्रेस दोनों को बहुमत तक पहुंचने के लिए सात-सात पार्षदों की जरूरत है।

ऐसे में निर्दलीय और अन्य पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। जोधपुर में बोर्ड गठन की यह लड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह के बीच राजनीतिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखी जा रही है।

अलवर में बीजेपी आगे, लेकिन बहुमत नहीं

अलवर में बीजेपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। कांग्रेस को 23 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 13 सीटें मिली हैं। 65 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 33 पार्षद चाहिए। बीजेपी को बहुमत के लिए पांच और कांग्रेस को 10 पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। यही वजह है कि अलवर में भी निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ने के लिए दोनों दलों की कोशिशें तेज हो गई हैं।

बीकानेर में कांग्रेस को बहुमत

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने 80 में से 42 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। यहां बहुमत का आंकड़ा 41 है। बीजेपी को 27 वार्डों में जीत मिली है। वहीं 10 सीटों पर निर्दलीय और एक सीट पर आरएलपी प्रत्याशी विजयी हुआ है।

संख्या के लिहाज से कांग्रेस बहुमत में है, लेकिन बीजेपी ने मेयर पद की दौड़ से खुद को अलग नहीं किया है। बीजेपी में श्याम सिंह हाडलां, सुरेंद्र सिंह शेखावत और भगवान सिंह मेड़तिया के नाम चर्चा में हैं। तीनों ने अपने स्तर पर पार्षदों का समर्थन जुटाने का भरोसा पार्टी को दिया है।

बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती संख्या की है। उसके पास 27 पार्षद हैं। अगर सभी 10 निर्दलीय और आरएलपी का एक पार्षद बीजेपी के साथ आ जाए, तो भी संख्या 38 तक ही पहुंचेगी। मेयर चुनाव में बहुमत के लिए 41 वोट चाहिए। ऐसे में बीजेपी को तीन और वोटों की जरूरत होगी। इसके लिए कांग्रेस खेमे से समर्थन जुटाने की कोशिश करनी पड़ सकती है।

नागौर का हाल भी जानिए

नागौर जिले की रियांबड़ी नगर पालिका में भी बोर्ड गठन को लेकर तस्वीर दिलचस्प है। यहां कुल 20 पार्षद हैं। बीजेपी के 10, कांग्रेस के 4, आरएलपी के 3 और निर्दलीय उम्मीदवारों के 3 पार्षद निर्वाचित हुए हैं।

बहुमत के लिए 11 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में बीजेपी को बहुमत हासिल करने के लिए केवल एक पार्षद के समर्थन की जरूरत है।

इसी बीच कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षदों की गाड़ी पर हमले का मामला भी सामने आया है। कांग्रेस ने इस मामले में पुलिस से जांच और सुरक्षा की मांग की है।

बीजेपी ने जिन निकायों में बहुमत हासिल नहीं किया है, वहां बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं, जिलाध्यक्षों, विधायकों और निकाय प्रभारियों को दी गई है। जरूरत के मुताबिक संभाग और जिलों से वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षक भी स्थिति पर नजर रख रहे हैं और अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप, बीजेपी कर रही हॉर्स ट्रेडिंग

बोर्ड गठन के लिए कांग्रेस भी अलग-अलग निकायों में समर्थन जुटाने में लगी है। इसकी जिम्मेदारी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रभारी और स्थानीय नेताओं को दी है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बीजेपी पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि ज्यादातर जगह निर्दलीय पार्षद कांग्रेस के साथ हैं और उनके समर्थन से पार्टी बोर्ड बनाएगी।

डोटासरा ने आरोप लगाया कि बीजेपी धनबल का इस्तेमाल कर बोर्ड बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसके लिए सीएमओ को फोन किए जा रहे हैं और जीते हुए निर्दलीय पार्षदों के परिजनों पर दबाव बनाया जा रहा है।

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वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के इन आरोपों को निराधार बताया है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि निर्दलीय और अन्य पार्षद उनके संपर्क में हैं। बीजेपी प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी के मुताबिक, कई निकायों के पार्षद बीजेपी के संपर्क में हैं और उसकी विचारधारा से जुड़े पार्षद पार्टी के साथ आने के लिए तैयार हैं।

21 सितंबर तक जारी रहेगी जोर आजमाइश

राजस्थान के जिन निकायों में बोर्ड गठन का गणित उलझा हुआ है, वहां एक-एक पार्षद का समर्थन महत्वपूर्ण हो गया है। बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने स्तर पर संपर्क और समर्थन जुटाने में लगी हैं।

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ऐसे में 21 सितंबर तक राजस्थान की निकाय राजनीति में संपर्क, समर्थन और बाड़ेबंदी का दौर जारी रहने की संभावना है। आने वाले कुछ दिन बोर्ड गठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम रहने वाले हैं।

Ashwani Tiwari

अश्वनी कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में पाँच वर्षों का व्यावसायिक अनुभव प्राप्त है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्थानीय समाचार पत्र से की थी, जहाँ उन्होंने सामाजिक मुद्दों, राजनीति और ग्रामीण विकास पर रिपोर्टिंग की। उनकी लेखनी में स्पष्टता, निष्पक्षता और गहराई होती है, जिससे पाठक आसानी से जुड़ पाते हैं।

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