Rajasthan 400 Crore Fraud – राजस्थान में 400 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। यह फर्जीवाड़ा डिजिटल सिग्नेचर के जरिए किया गया, जिसने पूरे सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Rajasthan 400 Crore Fraud – मामला जयपुर से जुड़ा हुआ है, जहां पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार, इस पूरे मामले में दिल्ली की एक व्यावसायिक संस्था, कई चार्टर्ड अकाउंटेंट और डिजिटल सिग्नेचर जारी करने वाली अधिकृत कंपनियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
Rajasthan 400 Crore Fraud – कैसे दिया गया ठगी को अंजाम
शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने करीब 400 लोगों के फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार किए। इन फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए विभिन्न संस्थानों के बैंक खातों तक पहुंच बनाई गई और करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर लिए गए।

गिरोह पहले व्यापारियों की डीजीएफटी (DGFT) आईडी को हैक करता था, उसमें बदलाव करता था और फिर जाली दस्तावेजों के आधार पर डिजिटल सिग्नेचर तैयार करता था।
Rajasthan 400 Crore Fraud –दिल्ली के रास्ते दुबई भेजा जाता था पैसा
जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम पहले दिल्ली भेजी जाती थी और वहां से दुबई ट्रांसफर कर दी जाती थी।
इस मामले में 6 अप्रैल को पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें सुल्तान खान, नंद किशोर, अशोक कुमार भंडारी, प्रमोद खत्री और निर्मल सोनी शामिल हैं। आरोपियों को जयपुर की अदालत में पेश कर 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
400 Crore Fraud in Rajasthan –दो साल से सक्रिय था गिरोह
पुलिस के अनुसार यह गिरोह पिछले करीब दो साल से सक्रिय था। यह नेटवर्क व्यापारियों की जानकारी में बदलाव कर उन्हें निशाना बनाता था।
फिलहाल दिल्ली, जोधपुर और सीकर समेत कई स्थानों पर छापेमारी जारी है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
KYC प्रक्रिया में भी बड़ा फर्जीवाड़ा
इस मामले में केवाईसी (KYC) प्रक्रिया में भी गंभीर लापरवाही सामने आई है। एक मामले में जयपुर के व्यक्ति की केवाईसी जोधपुर से ऑनलाइन की गई, जबकि भुगतान दिल्ली से हुआ और पूरी आईडी दुबई से संचालित हो रही थी।
गिरोह का सरगना केवाईसी के लिए 2 से 5 हजार रुपये देता था और वीडियो कॉल के जरिए सत्यापन पूरा कर लिया जाता था। आरोपियों के पास से मिले फर्जी पैन कार्ड में कई शब्दों की स्पेलिंग भी गलत पाई गई।
चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनियां जांच के दायरे में
स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश के अनुसार, अब तक इस गिरोह के 13 सदस्यों की पहचान की जा चुकी है।
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पुलिस यह भी जांच कर रही है कि डिजिटल सिग्नेचर जारी करने वाली कंपनियों ने बिना सही सत्यापन के इतने बड़े स्तर पर सर्टिफिकेट कैसे जारी किए। अधिकारियों का मानना है कि अंदरूनी मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी ठगी संभव नहीं है।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को भी खंगाला जा रहा है।
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यह मामला डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा में बड़ी खामियों को उजागर करता है और भविष्य में ऐसे फ्रॉड को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत को दर्शाता है।
