Rajya Sabha merger of seven AAP MPs with BJP – AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय मंजूर

Rajya Sabha merger of seven AAP MPs with BJP - AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय मंजूर

Rajya Sabha merger of seven AAP MPs with BJP – नई दिल्ली में राज्यसभा के भीतर एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्यसभा के चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) ने आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में AAP की स्थिति काफी कमजोर हो गई है।

Rajya Sabha merger of seven AAP MPs with BJP – AAP की ताकत घटी, BJP और NDA को मिला फायदा

इस निर्णय के बाद राज्यसभा में AAP के सांसदों की संख्या घटकर सिर्फ तीन रह गई है। वहीं, भाजपा की ताकत बढ़कर 113 तक पहुंच गई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का कुल आंकड़ा बढ़कर 148 हो गया है, जिससे सत्तारूढ़ पक्ष और मजबूत स्थिति में आ गया है।

Rajya Sabha merger of seven AAP MPs with BJP - AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय मंजूर
Rajya Sabha merger of seven AAP

Rajya Sabha merger of seven AAP MPs with BJP – इन सात सांसदों का हुआ विलय

जिन सात सांसदों को भाजपा में शामिल किया गया है, उनमें राघव चड्ढा (Raghav Chadha), अशोक मित्तल (Ashok Mittal), हरभजन सिंह(Harbhajan Singh), संदीप पाठक(Sandeep Pathak), विक्रमजीत साहनी(Vikramjit Sahney), स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) और राजिंदर गुप्ता (Rajinder Gupta) के नाम शामिल हैं। राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अब इन सभी को भाजपा सांसदों की सूची में दर्शाया जा रहा है।

Rajya Sabha merger –विलय की प्रक्रिया और चेयरमैन का निर्णय

सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा चेयरमैन से अनुरोध किया था कि उन्हें विलय के बाद भाजपा सदस्य के रूप में मान्यता दी जाए। चेयरमैन ने उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी।

AAP की आपत्ति और अयोग्यता की मांग

इससे पहले आम आदमी पार्टी ने इन सातों सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पार्टी ने चेयरमैन के समक्ष याचिका दायर कर उनकी सदस्यता समाप्त करने की अपील की थी। AAP सांसद संजय सिंह (AAP MP Sanjay Singh) ने भी कहा था कि जो सांसद पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाते हैं, उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को AAP को बड़ा झटका लगा था, जब उसके सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया। इन नेताओं ने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और विचारधारा से भटक गई है।

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आगे क्या?

इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद राज्यसभा की रणनीति और समीकरणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकता है। आने वाले समय में इसका असर विधायी प्रक्रिया और राजनीतिक समीकरणों पर साफ नजर आएगा।

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Ashwani Tiwari

अश्वनी कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में पाँच वर्षों का व्यावसायिक अनुभव प्राप्त है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्थानीय समाचार पत्र से की थी, जहाँ उन्होंने सामाजिक मुद्दों, राजनीति और ग्रामीण विकास पर रिपोर्टिंग की। उनकी लेखनी में स्पष्टता, निष्पक्षता और गहराई होती है, जिससे पाठक आसानी से जुड़ पाते हैं।

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