Udaipur Lake Accidents – झीलों की नगरी उदयपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक झीलों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। लेकिन हाल के दिनों में यही झीलें लोगों की जान के लिए खतरा बनती नजर आ रही हैं। Udaipur Lake Accidents – बीते मई महीने में तैराकी और आत्महत्या से जुड़े अलग-अलग हादसों में करीब 10 लोगों की मौत होने के बाद शहर में चिंता का माहौल है।
लगातार बढ़ रही डूबने की घटनाओं ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग अब झीलों के घाटों पर स्थायी सुरक्षा इंतजाम करने की मांग उठा रहे हैं।
Udaipur Lake Accidents – झीलों में बढ़ रहे हादसों से दहशत
उदयपुर की फतहसागर, पिछोला, गोवर्धन सागर, बड़ी तालाब और गंगू कुंड जैसी प्रसिद्ध झीलों में डूबने के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। ये सभी स्थान शहर के प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं, जहां हर दिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक पहुंचते हैं।

सुबह और शाम के समय झीलों के आसपास तैराकों और घूमने आने वाले लोगों की भीड़ रहती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की कमी हादसों की बड़ी वजह बन रही है।
Udaipur Lake Accidents –फतहसागर झील का हादसा बना चर्चा का विषय
हाल ही में फतहसागर झील में एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। वर्षों से बच्चों को तैराकी सिखाने वाले एक अनुभवी व्यक्ति की झील में डूबने से मौत हो गई। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि जब अनुभवी तैराक भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
Udaipur Lake News –सिविल डिफेंस टीम ने बताए चौंकाने वाले आंकड़े
सिविल डिफेंस के वॉलेंटियर्स के अनुसार, मई महीने में ही अलग-अलग जलाशयों से करीब 10 से 11 शव निकाले गए हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक माना जा रहा है।
वॉलेंटियर्स का कहना है कि उनकी टीम आपात स्थिति में हमेशा तैयार रहती है, लेकिन हादसों को रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है। उनका सुझाव है कि प्रमुख झीलों पर तीन शिफ्टों में कम से कम दो-दो सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
लेक पेट्रोलिंग बंद होने के बाद बढ़ी समस्या
ओल्ड सिटी के पूर्व पार्षद गोपाल नागर का कहना है कि कुछ साल पहले नगर निगम ने झीलों में नहाने और कपड़े धोने पर रोक लगाने के लिए ‘लेक पेट्रोलिंग’ व्यवस्था शुरू की थी। शुरुआती दौर में इसका सकारात्मक प्रभाव भी देखने को मिला था।
हालांकि पिछले डेढ़ से दो वर्षों से यह व्यवस्था लगभग बंद पड़ी है। इसके कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटक भी बिना किसी रोक-टोक के झीलों में उतर जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है।
सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग तेज
लगातार बढ़ती मौतों के बाद शहरवासियों ने प्रशासन से झीलों के घाटों पर स्थायी सुरक्षा गार्ड तैनात करने की मांग तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हादसों की संख्या और बढ़ सकती है।
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स्थानीय नागरिकों का मानना है कि झीलों की सुरक्षा केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है।
सुरक्षा के बिना झीलों का पर्यटन बन सकता है बड़ा जोखिम
उदयपुर की झीलें शहर की पहचान हैं, लेकिन बढ़ते हादसे और मौतें चिंता का विषय बन चुकी हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, लेक पेट्रोलिंग दोबारा शुरू करने और घाटों पर स्थायी गार्ड तैनात करने जैसे कदम उठाकर ही इन हादसों पर रोक लगाई जा सकती है। अन्यथा झीलों की खूबसूरती के साथ जुड़ी यह दुखद तस्वीर और गंभीर होती जा सकती है।
