Ashok Gehlot vs Ramdas Athawale – केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले इन दिनों जयपुर दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। Ashok Gehlot vs Ramdas Athawale – बैठक में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत भी मौजूद रहे। अधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा करने के बाद अठावले ने मीडिया से बातचीत की और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी।
अठावले ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं और उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है।
Ashok Gehlot vs Ramdas Athawale – राहुल गांधी पर साधा निशाना, जातीय जनगणना को लेकर उठाए सवाल
पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार ओबीसी वर्ग की जातीय जनगणना की मांग करते रहे हैं, लेकिन जब कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही तब इस दिशा में कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।

अठावले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जातिवार जनगणना कराने का फैसला लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की है, जिससे विभिन्न वर्गों की वास्तविक सामाजिक स्थिति का आकलन हो सकेगा।
Ashok Gehlot vs Ramdas Athawale – “हम सभी मोदीजी की छाया में हैं” : रामदास अठावले
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा सभी क्षेत्रीय दलों को एकजुट होकर इंडिया गठबंधन के साथ आने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए अठावले ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में पहले से ही कई दल शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “हम सभी मोदीजी की छाया में हैं। एनडीए में देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की अनेक पार्टियां शामिल हैं। दक्षिण भारत के कई दल भी हमारे साथ हैं। भाजपा ने लंबे समय तक विपक्ष में रहते हुए अपना विस्तार किया है और बाद में कई राजनीतिक दल उसके साथ जुड़े हैं। मेरी पार्टी भी भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है और मुझे इसमें कोई समस्या नजर नहीं आती।”
Ashok Gehlot statement – संजय राउत के बयान का गहलोत ने किया था समर्थन
दरअसल, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने हाल ही में सुझाव दिया था कि कांग्रेस से अलग होकर बनी क्षेत्रीय पार्टियों को दोबारा कांग्रेस में विलय कर लेना चाहिए। उनका मानना था कि इससे विपक्ष अधिक मजबूत हो सकता है।
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संजय राउत के इस सुझाव का समर्थन करते हुए अशोक गहलोत ने कहा था कि देश में लोकतंत्र चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस से अलग होकर बनी सभी क्षेत्रीय पार्टियों को वापस कांग्रेस में शामिल होने पर विचार करना चाहिए और राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहिए।
क्षेत्रीय दलों के भविष्य को लेकर तेज हुई सियासी बहस
संजय राउत और अशोक गहलोत के बयानों के बाद क्षेत्रीय दलों की भूमिका और विपक्षी एकता को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। वहीं, रामदास अठावले के जवाब ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में विपक्षी राजनीति और गठबंधन की रणनीति पर इस मुद्दे का असर देखने को मिल सकता है।
