Khatushyamji Lakhi Mela 2026 : खाटूश्यामजी में सजने लगा भव्य दरबार, फाल्गुन मेले की तैयारियां शुरू 

Khatushyamji Lakhi Mela 2026 : खाटूश्यामजी में सजने लगा भव्य दरबार, फाल्गुन मेले की तैयारियां शुरू 

Khatushyamji Lakhi Mela 2026 : राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्यामजी धाम इन दिनों भक्तिरस और उल्लास के रंगों में पूरी तरह रंगता नजर आ रहा है। Khatushyamji Lakhi Mela 2026 को लेकर पूरे क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। चारों ओर अबीर-गुलाल उड़ रहा है, भक्ति गीतों की गूंज सुनाई दे रही है और श्रद्धालु श्याम नाम का जाप करते हुए धाम की ओर बढ़ते चले आ रहे हैं। 21 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक मेले की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

Khatushyamji Lakhi Mela 2026: प्रशासन और मंदिर समिति अलर्ट मोड में

खाटूश्यामजी में उमड़ने वाली अपार श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और श्री श्याम मंदिर समिति पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के रास्तों तक रंग-रोगन किया जा रहा है। सड़कों की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल की व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है। खाटूधाम अब एक अलग ही आध्यात्मिक आभा में नजर आने लगा है।

Khatushyamji Lakhi Mela 2026 : खाटूश्यामजी में सजने लगा भव्य दरबार, फाल्गुन मेले की तैयारियां शुरू 
Khatushyamji Lakhi Mela 2026

Lakhi Mela 2026 in Khatushyamji : सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे पांच हजार जवान

मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर इस बार खास इंतजाम किए गए हैं। लगभग पांच हजार पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी खाटूश्यामजी और आसपास के क्षेत्रों में तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए करीब 400 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके साथ ही ड्रोन कैमरों के माध्यम से भी पूरे मेले की निगरानी की जाएगी। श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि भक्तों की सुरक्षा और सुगम दर्शन समिति की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था

बाबा श्याम के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सहज और सुरक्षित दर्शन मिल सकें, इसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं। भीड़ नियंत्रण के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। मंदिर समिति के स्वयंसेवक भी लगातार सेवाएं दे रहे हैं ताकि दर्शन प्रक्रिया व्यवस्थित बनी रहे और किसी को परेशानी का सामना न करना पड़े।

खाटूश्याम में सजे भक्तिमय बाजार

फाल्गुन मेले से पहले ही खाटूश्यामजी के बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। रींगस से खाटू धाम तक लगभग 17 किलोमीटर का पूरा मार्ग किसी मेले से कम नहीं लग रहा है। सड़क किनारे प्रसाद, मिठाइयों, गुलाब के फूल, इत्र, बाबा श्याम की तस्वीरें और निशान की दुकानें सजी हुई हैं। भक्तों की टोलियां ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते-गाते हुए रंग, अबीर और गुलाल उड़ाती हुई धाम की ओर बढ़ रही हैं। पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लास से भरा हुआ है।

फाल्गुन की मस्ती में डूबा खाटूधाम

Phalguna महीने में खाटूश्यामजी का रंग ही अलग होता है। हर ओर श्याम नाम की गूंज सुनाई देती है। श्रद्धालु हाथों में निशान लिए, पैदल यात्राएं करते हुए बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। रास्ते भर भजन-कीर्तन और फाग गीतों से वातावरण गूंजता रहता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरा खाटूधाम श्याम रंग में रंग गया हो।

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स्थानीय व्यापार और पर्यटन को मिलती है नई ऊर्जा

खाटूश्यामजी का लक्खी फाल्गुन मेला स्थानीय व्यापार और पर्यटन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। होटल, धर्मशालाएं, गेस्ट हाउस, वाहन चालक और छोटे व्यापारी पूरे वर्ष इस मेले का इंतजार करते हैं। मेले के दौरान रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है। राजस्थान रोडवेज और निजी परिवहन सेवाएं भी अतिरिक्त बसों और वाहनों की व्यवस्था कर रही हैं।

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आस्था और उत्सव का अद्भुत संगम

कुल मिलाकर खाटूश्यामजी का वार्षिक लक्खी फाल्गुन मेला आस्था, भक्ति और उत्सव का अद्भुत संगम है। रंग-बिरंगे अबीर-गुलाल, भक्तों की आस्था, प्रशासन की तैयारियां और श्याम नाम की गूंज मिलकर इस आयोजन को यादगार बना देती हैं। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे मेला नजदीक आएगा, खाटूधाम की रौनक और भी बढ़ती चली जाएगी।

Ashwani Tiwari

अश्वनी कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता क्षेत्र में पाँच वर्षों का व्यावसायिक अनुभव प्राप्त है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक स्थानीय समाचार पत्र से की थी, जहाँ उन्होंने सामाजिक मुद्दों, राजनीति और ग्रामीण विकास पर रिपोर्टिंग की। उनकी लेखनी में स्पष्टता, निष्पक्षता और गहराई होती है, जिससे पाठक आसानी से जुड़ पाते हैं।

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